दुनिया का एकमात्र देश जहां पर की जाती है मगरमच्छ की खेती, फिर कमाते हैं अरबों रुपये, जानिए कैसे?

खेती-बाड़ी या फार्मिंग का नाम सुनते ही किसी के दिमाग में सर्वप्रथम कौन सी चीज आ सकती है। हरे भरे खेत खलिहान, लहलहाती फसल और मेहनत करते किसान। यही ना या फिर और कुछ। हां और कुछ में किसान भारी संख्या में पशुपालन भी करते हैं जैसे कि पोल्ट्री फार्मिंग में मुर्गियों को पालना, गायों का संरक्षण या फिर मतस्य पालन यानी कि तालाबों में मछलियों को पालना, लेकिन सिर्फ यहीं फार्मिंग का अंत नहीं हो रहा।

Crocodile Farming

क्या आपको पता है कि दुनिया में एक ऐसी जगह भी है, जहां लोग ये मुर्गियां, गायों या सिर्फ मछलियों को नहीं, बल्कि खतरनाक जीव मगरमच्छ तक को पालने का व्यापार चला रहे हैं।जी हां, आपने ठीक पढ़ा। थाईलैंड वो देश है, जहां भारी संख्या में मगरमच्छों को पाला जाता है।

इसका उद्देश्य मगरमच्छ के चमड़े, मीट और खून हासिल करना है, जिसकी कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी ज्यादा है। थाईलैंड में मगरमच्छ के ये फर्म कोई 100-200 की संख्या में नहीं हैं, बल्कि यहां कुल 1000 के करीब फर्म हैं, जहां मगरमच्छों को पाला जाता है।

इन हजार फर्म में 1.2 मिलियन के करीब मगरमच्छ हैं। इनमें से कुछ फर्म में खुद के स्लॉटर हाउस भी हैं, जहां मगरमच्छों को काट कर उनके चमड़ों से लग्जरी चीजें बनायी जाती हैं। थाईलैंड के स बसे बड़े क्रोकोडाइल फर्म का नाम श्री आयुथ्या क्रोकोडाइल फर्म है, जो पिछले 35 सालों से ये काम करता आ रहा है। इस फर्म में कुल डेढ़ लाख के करीब मगरमच्छों का पालन पोषण होता है और समय आने पर उन्हें कानूनी तौर पर काट कर कामों में लगाया जाता है।

मगरमच्छ के चमड़े का होता है इस्तेमाल

जानकारी के मुताबिक इन मगरमच्छों के चमड़े से कई कीमती सामान बनाई जाती है, जिसमें बर्किन स्टाइल हैंडबैग शामिल है, जिनकी कीमत   2,356 डॉलर है, जबकि मगरमच्छ के चमड़े के सूट की कीमत लगभग 5,885 डॉलर है। वहीं, मगरमच्छ का मीट भी पर किलो 300 baht की कीमत पर बिकता है। कहा जाता है कि मगरमच्छ के मीट के कई स्वास्थ्य लाभ  हैं, जिस वजह से इसकी मांग भी ज्यादा है।

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