दुनिया की एकमात्र ट्रेन जिसे एक साथ चलाते हैं 7 ड्राइवर, डिब्बे गिनते-गिनते थक जाते हैं लोग, जानिए विश्व की सबसे बड़ी ट्रेन की कहानी

कल्पना कीजिए एक ऐसी पैसेंजर ट्रेन का जिसमें आप सफर कर रहे हैं और वह इतनी लंबी है कि उसमें 25-50 नहीं पूरी 100 बोगियां हैं जिसे एक साथ सात ट्रेन चालक चला रहे हैं तो आपको बता दें कि यह कोई कल्पना नहीं बल्कि हकीकत है। प्राकृतिक सुंदरता से सरोबार स्विट्जरलैंड की स्विस रेलवे द्वारा निर्मित “अल्पाइन क्रूज” नामक ट्रेन है।

World's Longest Train

स्विस रेलवे ने अपनी 175वीं वर्षगांठ पर लगभग 2 किलोमीटर लंबी ट्रेन को लांच किया। स्विट्जरलैंड के रैटियन रेलवे की माने तो यह दुनिया की सबसे लंबी ट्रेन है जिसमें 100 डिब्बे और 4550 सीटें हैं। सभी सुख सुविधाओं से लैस इस यात्री ट्रेन को सात चालकों की कुशल टीम एक साथ चलाती है।

ट्रेन का शानदार रूट

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस रूट से यह ट्रेन गुजरती है उसे यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज के रूप में 2008 में नामित किया जा चुका है। इस अति प्रसिद्ध मार्ग का नाम है अल्बुला/ बर्निना जो 22 सुरंगों और 48 पुलों से युक्त है। अल्बुला/बर्निना स्विट्जरलैंड ही नहीं दुनिया के सबसे सुंदर और आकर्षक मार्गों में जाना जाता है। ट्रेन के द्वारा पूरे रूट को कवर करने में तकरीबन 1 घंटे से अधिक का समय लगता है।

वैसे भी स्विट्जरलैंड जैसी जगह दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। इसी कड़ी में इस ट्रेन के शुमार हो जाने से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की संभावना और बढ़ जाएगी, इसी रणनीति के तहत स्विस गवर्नमेंट ने इस अनोखी ट्रेन को चलाने का फैसला किया।

ट्रेन रूट का सुंदर नजारा

ट्रेन लांचिंग के दिन का नजारा देखने लायक था। स्विस मीडिया के साथ ही दुनियाभर की मीडिया ने इस ट्रेन के रूट को कैमरे से कवर किया। आल्पस की मनमोहक पहाड़ियों से गुजरती हुई ट्रेन विशालकाय सर्प की तरह लग रही थी। 150 यात्रियों की सवारी वाली इस ट्रेन की छत पर पड़ रही धूप के परावर्तन के कारण चांदी सा आभास हो रहा था।

लगभग 3000 लोगों ने प्रीडा से अल्वेन्यू तक की 25 किलोमीटर दूरी तय करते हुए ट्रेन रूट के नजारे को एक बड़ी स्क्रीन पर देखा। इसके अलावा पहाड़ों से लेकर हर उस मार्ग पर लोग इकट्ठा थे, जिधर से ट्रेन गुजरने वाली थी। 22 पहाड़ियों, 48 पुलों जिसमें से एक की ऊंचाई 65 मीटर थी, को पार करती हुई सुर्ख लाल रंग की ट्रेन को पटरी पर लहराता हुआ देखने का लोगों का अलग ही उत्साह था।

आम जनता के व्यूप्वाइंट को ध्यान में रखते हुए उस दिन कुछ विशेष जगहों को यातायात के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस प्रकार रैटियन रेलवे द्वारा तैयार की गई यह ट्रेन एक नए कीर्तिमान के साथ स्विजरलैंड की इकोनॉमी में विदेशी मुद्रा के कलेक्शन का एक माध्यम भी बन गयी है।

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