तांत्रिकों ने 700 साल पुरानी विरासत पर जमाया कब्जा, 45 सालों से चल रहा भूत भगाने का खेल

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भारत में तंत्र विद्या हजारों सालों से चली आ रही है, इस वजह से हमारे देश में आज भी जगह-जगह पर तांत्रिक मौजूद है। लेकिन आज हम एक ऐसे किले के बारे में बात करने जा रहे हैं जो तकरीबन 700 साल पहले बनी थी, लेकिन अब उसे तांत्रिकों द्वारा कब्जा कर लिया गया है।

Feroz Shah Kotla

हम जिस जगह के बारे में बात कर रहे है हैं वो दिल्ली में स्थित है, जहां पर तांत्रिकों द्वारा भूत भगाने का काम किया जाता है। उस स्थान को लेकर तरह-तरह के दावे किए जाते हैं और कई बार यह खबर भी आई थी कि वहां पर जिन्न को देखा गया है तो चलिए अब हम उस भूतिया जगह के बारे में जानते हैं जो अब भूत भगाने का अड्डा बन चुका है।

दिल्ली के इस किले पर तांत्रिकों ने किया कब्जा

हम फिरोजशाह कोटला (Feroz Shah Kotla) के बारे में बात कर रहे हैं जो दिल्ली में स्थित है, लेकिन अब वहां पर तांत्रिकों का कब्जा हो चुका है जहां भूत-प्रेत भगाने का कम किया जाता है। फिरोजशाह कोटला को 14वीं शताब्दी के दौरान फिरोजशाह तुगलक (Firuz Shah Tughlaq) ने बनवाया था। लेकिन अब वह स्थान तंत्र-मंत्र के लिए जाना जाता है, इस वजह से उसे जिन्नों का किला भी कहा जाता है।

भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण (ASI) ने कुछ समय पहले यह दावा किया था कि अब फिरोजशाह कोटला के किले पर तांत्रिकों द्वारा तंत्र-मंत्र नहीं किया जाता है, क्योंकि अब उसे बंद करवा दिया गया है। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है, क्योंकि हाल ही में वहां पर कुछ मीडिया वाले पहुंचे थे, जिन्होंने दावा किया है कि आज भी फिरोजशाह कोटला के किले पर तांत्रिकों द्वारा भूत भगाने का काम किया जा रहा है।

भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा कहा गया था कि फिरोजशाह कोटला के किले पर जो पहले तांत्रिकों द्वारा तंत्र-मंत्र तथा भूत-प्रेत भगाने का काम किया जा रहा था, अब उसे रोक दिया गया है। लेकिन जैसे ही वहां पर मीडिया वाले पहुंचे, उसके बाद इसकी हकीकत सामने आ गई और साफ हो गया कि एएसआई जो कुछ कह रही है उसमे कुछ भी सच्चाई नहीं हैं।

किले पर कब से चल रहा भूत-प्रेत भगाने का खेल

फिरोज शाह कोटला को साल 1913 में भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण (ASI) ने अपने संरक्षण में ले लिया था, तब से वह किला एएसआई के संरक्षण में मौजूद है। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि साल 1977 में एक मुस्लिम फकीर वहां पर रहने के लिए आया था, फिर उसने एक अफवाह फैला दी थी कि वहां पर जिन्न रहते हैं। उसके बाद से धीरे-धीरे फिरोज शाह कोटला तांत्रिकों के लिए भूत भगाने का अड्डा बन गया।

भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण (ASI) ने अब से 113 वर्ष पहले फिरोज शाह कोटला को अपने संरक्षण में लिया था, लेकिन उसके 64 वर्ष बाद वहां पर तंत्र-मंत्र का कम शुरू हुआ। इस तरह पिछले 45 वर्षों से फिरोज शाह कोटला के किले पर तांत्रिकों द्वारा आज भी भूत भगाने का कम किया जा रहा है। इस रोकने के लिए एएसआई ने उसके तहखानों में ताला लगवा दिया है, लेकिन यह कम भी उन्होंने अच्छी तरह नहीं किया है। जिसका नतीजा यह है कि आज भी बहुत सारे तांत्रिक उस स्थान पर भूत-प्रेत भगाने का कम कर रहे हैं।

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