आरबीआई ने जारी की नई बुलेटिन, मॉनेटरी पॉलिसी को मिली पहली बड़ी कामयाबी, महंगाई दर में हुई कमी

भारत में महंगाई तेजी से बढ़ रही है, जिसे नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा पूरी कोशिश की जा रही है। महंगाई की वजह से रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया को कर्ज भी महंगा करना पड़ा था, लेकिन अब अच्छी बात यह है कि महंगाई दर 6 प्रतिशत से नीचे आ गई है। इस वजह से आरबीआई को एक बड़ी कामयाबी मिली है।

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आरबीआई के जनवरी मासिक बुलेटिन में एक लेख में कहा गया है कि मुद्रास्फीति को सहिष्णुता बैंड में लाया जा रहा है और प्रमुख संकेतकों से पता चलता है कि चालू खाता घाटा 2022 और 2023 के बाकी हिस्सों में कम होने के रास्ते पर है।

आरबीआई की इस बुलेटिन में तीन भाषण और पांच लेख शामिल हैं। ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ लेख में कहा गया है, “वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े क्षेत्रों में मंदी की संभावनाओं के साथ विकास में मंदी आधारभूत आकलन बन गया है, भले ही मुद्रास्फीति लक्ष्य से काफी ऊपर हो।”

इसमें कहा गया है कि उभरते हुए बाजार बीते साल की तुलना में अधिक लचीले दिखाई दे रहे हैं, लेकिन 2023 में उनका सबसे बड़ा जोखिम अमेरिकी मौद्रिक नीति और अमेरिकी डॉलर से उपजा है।

“भारत में, मजबूत राजस्व के बीच कमोडिटी की कीमतों में नरमी और अन्य लागतों ने कॉर्पोरेट प्रदर्शन को बढ़ावा दिया है। मुद्रास्फीति को टॉलरेंस बैंड में लाया जा रहा है और प्रमुख संकेतकों से पता चलता है कि चालू खाते का घाटा 2022 और 2023 के बाकी हिस्सों में कम होने के रास्ते पर है।

लेख ‘भारत में उत्पादकता वृद्धि : एक अनुभवजन्य आकलन’ में कहा गया है कि उत्पादकता वृद्धि या तो संसाधनों के पुनर्आवंटन या तकनीकी प्रगति के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। यह लेख इस बात की जांच करना चाहता है कि क्या भारत में कुल उत्पादकता वृद्धि संसाधन पुनर्आवंटन प्रभावों या 2001-19 के दौरान प्रत्येक क्षेत्र के भीतर तकनीकी प्रगति में वृद्धि से प्रेरित है। यह लेख उन प्रमुख क्षेत्रों पर भी नज़र डालता है, जिन्होंने समग्र उत्पादकता वृद्धि में योगदान दिया।

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