लोन सेटलमेंट करने से पहले हो जाए सावधान, समय रहते जान लें इसके नुकसान, वरना होगा बड़ा पछतावा

भारत में लोन लेने का चलन बरसो पुराना है। लोग अपनी आगे की पढ़ाई के लिए एजुकेश लोन लेते हैं, जबकि अपना घर बनाने के लिए भी होम लोन लेते हैं। बैंक कुछ दस्तावेजों की जांच कर लोन आसानी के साथ मोहय्या करा देता है और महीने की EMI बना देता है। हालांकि आर्थिक स्थिति के कारण कुछ लोग EMI नहीं भरते हैं।

Loan Settlement

ऐसे में बैंक अपने रिकवर एजेंट को ग्राहक के घर पैसा वसुलने के लिए भेजता है। बैंक लोन लिए हुए व्यक्ति को बाद में सेटलमेंट का ऑप्शन देता है. लोन सेटलमेंट में ग्राहकों को फायदे के आलावा कई बड़े नुकसान भी होते हैं।

रिकवरी एजेंट से छूट जाता है पीछा

लोन की राशी वसूलने के लिए एजेंट बार-बार अपने ग्राहकों को परेशना करता है और घर पर दस्तक देता रहता है। हालांकि लोन सेटलमेंट के बाद एजेंट से पीछा छूट जाता है, जो भी व्यक्ति लोन लेता है और 90 दिनों तक लोन की EMI जमा नहीं करता है तो बैंक लोन की कैटगरी को नॉन परफॉर्मेंग एसेट NPA में डाल देता है।

इसक बाद बैंक ग्राहकों को वन टाइम सेटलमेंट के लिए कहता है। इस प्रकिया में बैंक अपने मूल को लेलेता हैं और बची हुई ब्याज की राशी को कम कर देता है। इसके बाद ग्राहक पे कम बडन पड़ता है और वो लोन को जमा करने के लिए सक्षम हो जाता है।

लेन सेटलमेंट के भारी नुकसान

जहां एक तरफ लोन सेटेलमेंट का फायदा है तो दूसरी ओर इसका नुकसान भी है। दरअसल बैंक तो लोन का सेटलमेंट कर देता है, लेकिन इसका असर सीधा आपके क्रेडिट पर पड़ता है, जिससे आपका CIBIL स्कोर खराब हो जाता है। एक बार आपका सिबिल स्कोर खराब होने का मतलब ये है कि आपको दुबारा लोन लेने के लिए कई सारी समस्या से जूझना पड़ेगा. सिबिल स्कोर 7 सालों तक खराब रहता है। ऐसे में आप लोन लेने के लिए सात सालों तक हाथ मलते रह जाएंगे।

WhatsApp चैनल ज्वाइन करें