Lifestyle: ये 5 बुरी आदतें नहीं छोड़ी तो उम्र भर पछताएंगे…! समय रहते नहीं किया सुधार, तो जीवन बन जाएंगे नर्क

Lifestyle: हम वर्तमान में 21वीं सदी में जी रहे हैं। इस जेनरेशन को ‘जेनरेशन ऑफ ब्रोकेन हार्ट’ कहा जाता है। दरअसल इसका मतलब है कि आज की जेनरेशन के लोग भावनात्मक रूप से टूटे हुए लोग हैं। इसके पीछे इंसान की ही कई गलतियां छुपी रहती हैं। इन गलतियों को अगर किसी ने समय रहते नहीं सुधारा, तो उसका जीवन नर्क से कम नहीं बनेगा। आज हम उन्हीं गलत आदतों से आपको रूबरू करवाएंगे।

Lifestyle: इन 5 बुरी आदतों से खुद को बचाएं

लाइफ प्लान करने में देर न करें

आज के दौर में जीवन जीना बहुत कठिन हो गया है। ऐसे में सुखी व्यक्ति वही है, जो अपने जीवन को प्लान करके जीता है। करियर में क्या करना है, पढ़ाई में कौन सा कोर्स करना है, घर कब लेना है, जीवनसाथी कैसा होना चाहिए, बच्चे कब करने चाहिए, ये ऐसे कुछ निर्णायक फैसले होते हैं, जो व्यक्ति को प्लानिंग के साथ लेना चाहिए।

युवा अवस्था में बुरी आदतों पर न करें खर्च

जब हम युवा होते हैं, तो हमें नई-नई चीजों के बारे में जानने व अपनी जीवन में उतारने का जोश व जुनून होता है। इस चक्कर में कई बार कुछ युवा गलत रास्ते पर चले जाते हैं। यानि उन्हें नशे जैसी चीजों की गलत आदत लग जाती है। इनपर व्यक्ति अपने सारे पैसे तक लुटा देता है। इससे बचने की जरूरत है।

फैमिली पर ध्यान न देना

आजकल शादियां व रिश्ते काफी जल्दी-जल्दी टूट जाते हैं। इसके पीछे अपने पार्टनर को और अपनी फैमिली को टाइम न देना सबसे बड़ा कारण है। लोग अपने काम में और मौज मस्ती करने में कभी-कभी इतने मशगूल हो जाते हैं कि जो सबसे ज्यादा जरूरी परिवार के लिए समय नहीं निकाल पाते। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा जाता है और ऐसे रिश्ते टूट जाते हैं।

किताबें पढ़ने के बजाय मोबाइल चलाना

कहते हैं एक किताब 10 अच्छे मित्र के बराबर होता है। इसके अलावा किताबें पढ़ने से व्यक्ति के बुद्धि विवेक में वृद्धि होती है। हालांकि आजकल के युवा या व्यस्क किताबों के बजाय फोन चलाने में व्यस्त रहते हैं। इसका परिणाम ये होता है कि उनकी आंखें कमजोर होती हैं। इसके साथ उनके मस्तिष्क पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

खुद को प्राथमिकता न देना

व्यक्ति अपनी खुशियों का जिम्मेदार खुद होता है। ऐसे में कई बार हम ये गलती करते हैं कि किसी ओर के हाथों में अपनी खुशियों की चाभी दे देते हैं। हालांकि यह सही नहीं है। इसमें कई बार हमें निराशा मिलती है। उस स्थिति में हमें किसी ओर से पहले स्वयं को प्राथमिकता देनी चाहिए। जो भी खुद को अच्छा लगता है, वो करना चाहिए। इससे मन को काफी शांति पहुंचती है।

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