Chanakya Niti: मनुष्य के जन्म से पहले तय हो जाती है ये 5 चीजें, चाहकर भी कोई उसे नहीं बदल सकता

आचार्य चाणक्य को राजनीति, कूटनीति और अर्थ नीति का परम ज्ञाता माना जाता है। इन विषयों पर उनके विचार और उसकी उक्तियां आज तक प्रभावी और सत्य सिद्ध हुई हैं। आचार्य ने अपनी नैतिक उक्तियों के माध्यम से मानव जीवन से संबंधित ऐसे तथ्यों का उल्लेख किया है जो जन्म के पहले ही नियत हो जाते हैं और जन्म के बाद उनकी मात्रा और प्रभाव को हम घटा बढ़ा नहीं सकते।

Chanakya Niti

इसके पीछे कहीं न कहीं हमारे प्रारब्ध कर्मों की भूमिका होती है। आचार्य ने अपनी नीतिगत उक्तियों में मानव जीवन में उपलब्ध 5 मूल तथ्यों का उल्लेख किया है जो जन्म से पहले ही पूर्व निर्धारित हो जाते हैं।

1. आयु

आचार्य चाणक्य ने कहा है कि व्यक्ति की आयु मां के गर्भ में ही सुनिश्चित हो जाती है। इसका तात्पर्य यह है कि हमें कितनी उम्र तक जीवित रहना है और कब मृत्यु होगी, यह तभी निर्धारित हो जाता है जब व्यक्ति मां के पेट में गर्भस्थ रहता है।

2. कर्म

आचार्य चाणक्य ने कर्म सिद्धांत की बहुत सुंदर व्याख्या की है। भगवत् गीता के समान ही आचार्य चाणक्य ने मानव जीवन में कर्म की व्याख्या का उल्लेख करते हुए कहा है कि वर्तमान जीवन की परिस्थितियां हमारे पूर्व जन्म के कर्मों का परिणाम हैं और हर व्यक्ति को सहज रूप से सशरीर उसे भुगतना पड़ता है।

3. विद्या: शैक्षिक स्तर

आचार्य चाणक्य ने स्पष्ट कहा है कि विद्यार्जन भी जन्म से पूर्व निश्चित हो जाता है। बहुत प्रयास और चाह रखने पर भी हम उतनी ही शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं जितनी हमारे प्रारब्ध में है।

4. धन: आर्थिक स्थिति

चाणक्य नीति के अनुसार आर्थिक स्थित का निर्धारण भी जन्म पूर्व ही तय हो जाता है। हमारे भाग्य में जितना लिखा होता है वही हमें प्राप्त होगा, ना उससे ज्यादा ना कम। अत: जो प्राप्त है उससे संतुष्ट रहना चाहिए।

5. मृत्यु

आचार्य चाणक्य अपने नीति वाक्य में कहते हैं कि व्यक्ति को कब और कैसे मृत्यु को प्राप्त होना है, यह भी जन्म से पूर्व ही निश्चित हो जाता है। इसीलिए व्यक्ति को सत्कर्म से प्रेरित होकर कर कर्म करना चाहिए। क्योंकि भावी जीवन में उसका परिणाम अवश्य भुगतना होगा।

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