क्या पिता बेटों के नाम संपत्ति करने के बाद वापस ले सकता है? इस पर हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

हर पिता एक ना एक दिन अपनी सारी संपत्ति अपने बेटों को दे देते हैं, क्योंकि वही उनकी संपत्ति का उतराधिकारी होते हैं। लेकिन कई बार कुछ लोगों के साथ बुरा होने लगता है जिस वजह से वो अपने बेटों से संपत्ति वापस लेने के बारे में सोचता है। इस वजह से कुछ लोगों के मन में एक सवाल चल रहा होगा कि क्या बेटों के नाम संपत्ति करने के बाद पिता वापस ले सकता है।

High Court Decision

उच्च न्यायालय ने कुछ ही समय पहले एक केस की सुनवाई में यह फैसला सुनाया है कि यदि किसी पिता ने पुत्रों के नाम अपनी प्रॉपर्टी कर दी है तो बाद में किन्ही कारणों से वह इस प्रॉपर्टी ट्रांसफर को रद्द नहीं कर सकता। तो चलिए जानते हैं कि कोर्ट ने उस पर क्या-क्या कहा है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला

यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में संपत्ति विवाद के रूप में दाखिल हुआ था। 97 वर्षीय एक वयोवृद्ध ने अपने दो पुत्रों पर आरोप लगाते हुए यह याचिका दाखिल की थी कि उनके दो पुत्रों ने धोखे से प्रॉपर्टी गिफ्ट के रूप में अपने नाम ट्रांसफर करवा ली और अब वो मेरी देखभाल ना करते हुए मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं। अब इसे कानूनी नियमों की बाध्यता कह लीजिए कि इस केस में कोर्ट का फैसला नैतिक पक्ष पर भारी पड़ा।

कोर्ट का तर्क यह था कि किसी भी कानून को उसके जारी होने की अधिसूचना की तारीख से पहले लागू नहीं किया जा सकता है। क्योंकि माता-पिता, वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007 की धारा 23 के प्रावधानों को कानूनी रूप से 2008 से लागू किया गया था। इस केस में बुजुर्ग ने अपने दोनों पुत्रों के नाम मई 2007 में प्रॉपर्टी ट्रांसफर की थी।

पुत्रों ने धोखे से अपने नाम किया प्रॉपर्टी

दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बुजुर्ग ने अपनी व्यथा जाहिर की जिसके अनुसार दिल्ली के लाजपत नगर स्थित उनके विशालकाय भवन के बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर तथा फर्स्ट फ्लोर को उनके पुत्रों ने धोखे से गिफ्ट के रूप में अपने नाम ट्रांसफर करवा लिया। याचिका में बुजुर्ग ने यह भी लिखा था कि प्रत्येक फ्लोर का किराया 10 लाख से अधिक था। बुजुर्ग के अनुसार दोनों बेटे उसकी देखभाल नहीं करते साथ ही उसे आए दिन प्रताड़ित भी करते हैं।

इसी कारण मैं गिफ्ट डीड को निरस्त करना चाहता हूं। इस याचिका के मद्देनजर चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने प्रॉपर्टी ट्रांसफर के इस कानून को चुनौती देते हुए कहा कि बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करने और उनकी देखभाल न करने की स्थिति में इस कानून को अमान्य माना जाए।

इस पर हाईकोर्ट ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उपहार में मिली हुई संपत्ति को रद्द करने के लिए विशेषाधिकार का प्रयोग नहीं किया जा सकता। पर इसके साथ ही कोर्ट ने बुजुर्ग को अपने बेटों के विरुद्ध एक विशेष फोरम में शिकायत करने की अनुमति दे दी है।

गिफ्टेड प्रॉपर्टी को किन परिस्थितियों में रद्द कर सकते हैं?

हालांकि कानूनी रूप से गिफ्ट के रूप में ट्रांसफर की गई संपत्ति को वापस नहीं लिया जा सकता है। लेकिन प्रॉपर्टी ट्रांसफर एक्ट की धारा 126 के अंतर्गत कुछ विशेष कंडीशन्स के तहत गिफ्ट डीड को निरस्त करने का जिक्र है जिसमें यह प्रावधान है कि यदि जिस उद्देश्य से प्रॉपर्टी उपहार के रूप में ट्रांसफर की गई है, वह मकसद यदि पूरा ना हो तो ऐसी दशा में ट्रांसफर करने वाला अपनी डीड को रद्द कर सकता है।

इस प्रकार प्रॉपर्टी ट्रांसफर एक्ट की धारा 126 का इस्तेमाल करते हुए ऐसे बुजुर्ग पिता जिसने अपनी प्रॉपर्टी इस डील के तहत आपनी संतान को ट्रांसफर की है कि वह जीवन भर उसकी देखभाल करेंगे पर संतान उस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करती है तो ऐसी दशा में पिता अपनी गिफ्ट डीड को रद्द करके संपत्ति वापस लेने का हकदार है।

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